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She is single :- When some people speak these words they have some meaningful expressions  on their faces, sometimes they show expressions of pity, sometimes as if  having fun or weighing her character but this status is hardly expressed in a normal way.           There may be various causes for a lady to be single. She might not have got an appropriate match for herself, she could not have adjusted with her husband and in laws due to  her own faults, beliefs, ideology or the same of the other side or of both the parties, she might be a divorcee or a widow.             Whatever may be the cause these ladies remain in a period of deep sorrow for some days, some months or some years and during that period the tears do not dry from their eyes, sadness on the face becomes their identity, everybody takes a sigh and tries to console them but some of them laugh at back and blame her to be lethargic, not able to adjust ...

मुहब्बत का इज़हार

मुहब्बत का इज़हार मेरे लिखे शेर पढ़कर किसी ने पूछा, बताएं मुहब्बत का इज़हार कैसे किया करते हैं?  हमने मुस्कुरा कर कहा कि, हम ही कर देते जो जानते कि, मुहब्बत का इज़हार कैसे किया करते हैं। अनिता जैन weeleendshayar

ग़ज़लः- कुछ इस तरह गुज़रती है ज़िंदग़ी आजकल।

ग़ज़लः- कुछ इस तरह गुज़रती है ज़िंदग़ी आजकल।    न सुबह रुमानी न शाम सुरमई लगती है आजकल, कुछ इस तरह गुज़रती है ज़िंदग़ी आजकल। टूटकर दिल हो गया है यूं बेज़ार तुझसे, कि,तेरी दर पर उठती नहीं पलक आजकल। निग़ाह-ए -शोख़ नापती थी ज़मीनो-असमां पल में, सन्नाटों से चलकर सन्नाटों पे ख़त्म होती है नज़र आजकल। कभी वक्त को रोकने की ख़वाहिश होती थी तुझे रूबरू पाकर, हर लम्हा बिना जिए गुज़ार देने की कोशिश होती है आजकल। तुझसे मिलने का इंतज़ार होता था बिछड़ने के पल से, ख्यालों में भी तेरी आमद रुला देती है आजकल। जिस मिट्टी में ढूँढते थे तेरे आसपास होने के निशां, वो मिट्टी बेवज़ह कदमों से लिपटती सी लगती है आजकल। हवाएँ जो सहलाती थीं चेहरे को नर्मी से, वो हवाएँ अंगार सी लगती हैं आजकल। महफ़िलें जो ज़िंदादिली से  सराबोर लगती थीं, ज़िंदग़ी में एक ख़लिश सी छोड़ जाती है आजकल। अनिता जैन Weekendshayar

मेरी जान तू उदास क्यूं है?

मेरी जान तू उदास क्यूं है? दिल को करती है छलनी,हटा इसे, चेहरे पे ये मायूसी क्यूं है? जीना मुश्किल करती है,तेरे माथे पे शिकन, आवाज़ में बेबसी क्यूं है? मुहब्बत के नग़मे पर भी तेरे साज़ से बजती बेकसी क्यूं हैं? हूँ हैरान, हूँ परेशान,मेरी जान तू उदास क्यूं है? उजड़ी ज़मीनों पर सरसब्ज़ बाग़ खिलाने की कोशिश क्यूं है? ठूंठ पड़े पेड़ों पर पंछियों को बसाने की ख़्वाहिश क्यूं है? भरे गुलिस्तां में बैठा तू फूलों और कलियों से बेज़ार क्यूं है? भरले दामन में खिलती बहार को, मेरी जान तू उदास क्यूं है? सुनहरे कल का पैग़ाम लाई चिड़ियों का गान अनसुना क्यूं है ?नूर - ए-शम्स का इस्तकबाल कर,रोशनी से अनजाना क्यूं है? कलकल करती नदियों का संगीत सुन, तू इतना अनमना   क्यूं  है। इनके साथ मिला ले ताल से ताल , मेरी जान तू उदास क्यूं है? खुश होता हूँ तेरी ख़ुशी में,सोचे ज़माना ये खुश क्यूं है?कामयाबी पर झूमता हूँ तेरी तो बवाल कि ये हँसता क्यूं है? यूं रहकर रूठा- रूठा सा मेरी खुशियों का करता कत्ल-ए- आम क्यूं है? मेरी तरह सीख ले हँसकर जीना, मेरी जान तू उदास क्यूं है? जिन रास्तों को...

इस बात का शुक्रगुज़ार रहूँगा।

इस बात का शुक्रगुज़ार रहूँगा। अगर तू साथ है तो मुश्किल डगर भी आसान है, तेरे कदमों की चाप से मिलती मेरे कदमों को जान है। शायद लब से न कहूँ पर तू ही मेरा दिल मेरी जान है, जो न पाऊँ आसपास तुझको लगता जहां सुनसान है। जो हम साथ -साथ चलें तो बियाबां में भी बहार है, हो जहां साथ पर तुम बिन जीना दुश्वार है। हर सुबह खिलती है तब जब होता तेरा दीदार है, तेरी पलकों के परदे गिरने पर शाम होती ढलने को बेकरार है। तू जो साथ चलेगी जीवन मधुबन सा खिलता रहेगा, हर खुशी बढ़ती रहेगी हर ग़म घटता रहेगा। तुझसे ही मेरे घर का कोना- कोना संवरता रहेगा, जीता हूँ इसी आस में कि, ताउम्र तेरा प्यार बरसता रहेगा। जीवन की ढलती साँझ में तू मेरे साथ होगी जब थक कर बैठूंगा, हर नज़ारा तू मेरी मैं तेरी  नज़रों देखूँगा। बिन कहे हर बात तू मेरी मैं तेरी समझूँमा, ख़ुदा ने तुझे बख़्शा मुझको,इस बात का शुक्रगुज़ार रहूँगा। अनिता जैन Weekendshayar

तुझे इस जहां के लिए मांगा करते हैं।

तुझे इस जहां के लिए मांगा करते हैं।  न हम मुकम्मल हुए तो क्या ग़म है, तुझे आबाद देखकर ही खुश  रहा करते हैं। तुझे फूलों भरा चमन मिले ये दुआ  है, उजाड़ बियाबान में भी हम तो खुशी से सफ़र करते हैं। न आज़माओ हम पे ज़हर- ओ-खंजर,  इस सुर्ख़ाब रुख पर हम तो यूं ही जां निसार करते  हैं। तुझे क्या ज़रूरत खुशियाँ हमसे मांगने की, तेरी मुस्कुराहट पर हम तो अपना जहां कुर्बान करते हैं। न बैठ तू उदास और बेज़ार ऐसे, तेरी मुस्कुराहट को हम तो हफ़्तों तरसा करते हैं। न तोहफों से तौला कर मेरे इश्क को, तेरे नूर- ए-नज़र से ही हम तो  अमीर हुआ करते हैं। न वहम कर मेरे नेक इरादा- ओ- करम पे,  तुझे खुद के लिए नहीं हम तो जहां के लिए मांगा करते हैं। अनिता जैन weekendshayar word-meaning:- 1.मुकम्मल:- complete 2.उजाड़:- destroyed / barren 3.बियाबान :- desert 4. खंजर:- dragger/ कटार 5.सुर्खाब रुख़ :- गुलाबी चेहरा 6.बेज़ार :- unhappy/ sick नाख़ुश  7. नूर- ए- नज़र :- आँखों की चमक
कविता: तुझे ही ख़ुदा समझ बैठा। तेरे नाम की अर्ज़ियाँ ख़ुदा को देते-देते, ख़ुदा को ही भूल गया। अरसा बीता उसकी चौखट पर सर झुकाए,तुझे ही अपना ख़ुदा समझ बैठा। तेरे इश्क में डूबे शेर लिखते- लिखते,ख़ुदा की बंदग़ी भूल गया। दिन रात सोचता हूँ तुझे,तुझे ही पाक़ क़ुरान समझ बैठा। उस पुरानी झील के किनारे बैठ,लहरों को ताकना भूल गया। डूब जाता हॅूँ तेरी आँखों में, तुझे ही अपना समंदर समझ बैठा। आसमां से दिन - रात का जो राब्ता  था, सब भूल गया। तू ही शम्स तू ही क़मर, तुझे ही अपना आसमान समझ बैठा। तन्हाई के आलम में ख़ुद को,अकेला समझना भूल गया। तेरी यादों की तस्वीरों से घिरा, ख़ुद को आबाद समझ बैठा। तेरे इश्क से दुनिया में रुसवाई होगी मेरी, ये भी भूल गया। तेरे ख़्वाबों में खोए-खोए मुस्कुराने को, अपनी पूरी ज़िंदगी समझ बैठा। इश्क को मंज़िल इज़हार से मिलती है,ये पूरी तरह से भूल गया। तेरे ख़्यालों में जीने में ही,अपनी मुहब्बत को मुकम्मल समझ बैठा। अनिता जैन weekendshayar Word meaning :- शम्स - सूरज (Sun)  क़मर - चाँद (moon)

कविता:- कितनी कोशिशें !!??

कविता:- कितनी कोशिशें !!??  कितनी कोशिशों कीं तेरे नाम को ज़ुबां पर न लाने  की, काश एक कोशिश तुझे  पुकारने की की होती, तो ज़िंदग़ी कुछ और  होती। कितनी कोशिशें कीं तेरी आँखों से छलकते प्यार को नकारने की, काश एक कोशिश आँखों में डूबने की की होती, तो जिंदग़ी कुछ और होती। कितनी कोशिशें कीं तेरी चाप सुनकर रास्ते बदलने की, काश एक कोशिश तेरे साथ चलने की की होती, तो ज़िंदग़ी कुछ और होती। कितनी कोशिशें कीं तेरी आमद-ए-महफ़िल से कतराने की, काश एक कोशिश शिरकत की की होती,  तो  ज़िंदग़ी कुछ और होती। कितनी कोशिशें की अपने दिल में बसे तेरे प्यार को झुठलाने की, काश एक कोशिश इसे तेरे दिल की राह बताने की की होती, तो ज़िंदग़ी कुछ और होती। कितनी कोशिशें कीं उमंगों के पर कतरने की, काश एक कोशिश इनको परवाज़ देने की की होती, तो ज़िंदग़ी कुछ और होती। कितनी कोशिशें कीं तुझसे दूर जाने की, काश एक कोशिश पास आने की की होती, तो ज़िंदग़ी कुछ और होती। अनिता जैन weekendshayar. Blogspot.in 
कविताः तुझको दुआ देता हूँ , खुद बरबाद हुए जाता हूँ । झरता है तू आखों के प्यालो से, बसता है पलकों के शामियाने में । प्यार इस कदर करता हूँ कि, हर खुशी तुझे नज़र किए जाता हूँl तुझको दुआ देता हूँ,खुद बरबाद हुए जाता हूँl जाता हूँ दर पे ख़ुदा की अपने हाल पर रहम माँगने, पर झुकते ही सर सजदे में,तेरे ही हक में इबादत किये जाता हूँl तुझको दुआ देता हूँ,खुद बरबाद हुए जाता हूँl वादा करता हॅूँ हर रात खुद से न देखूँगा तुझे ख्वाबों  में, पर पलक मूंदते ही हर ख्वाब तेरे ही नाम किए जाता हॅूँl तुझको दुआ देता हॅूँ, खुद बरबाद हुए जाता हूँ। तेरे संग तय की राहों पर चाहता नहीं चलना, पर हर राह पर तेरे नक्श- ए- कदमों की तलाश किए जाता हूँl तुझको दुआ देता हॅूँ,खुद बरबाद हुए जाता हूं। कभी ज़िक्र नहीं होता तेरा मेरे कामों की फ़ेहरिस्त में, पर अनचाहे अनजाने ही अपने शामो - सहर तेरे नाम किए जाता हूँl तुझको दुआ देता हूँ,खुद बरबाद हुए जाता हॅूँl सोचता हूँ तुझको,चाहता हॅूँ तुझको हर वक्त बेख़याली में, पर इस गिरह से  फिर भी आज़ाद होने की कोशिश किए जाता हूँl तुझको दुआ देता हूँ , खुद बरबाद हुए ...

तू मुझे याद आता रहा।

कविताः तू मुझे याद आता रहा।  मैं तेरे दिल की सुनता रहा,तू मेरे दिल की सुनता रहा।  आँखों की बोली तू मेरी मैं तेरी समझता रहा। जाने मुहब्बत थी या वक़्ती जज़्बा जिसे दिल प्यार समझता रहा। कोई वजन- ओ - पैमाइश नहीं मुहब्बत में,मैं तुझे तू मुझे 'बहुत' चाहता रहा। मुहब्बत दिल का भरम है,ये दुनिया को समझाता रहा। अरे करो तो दुनिया में क्या काम कम है, ये सिखाता रहा। पर खुद अपना दिल ही बेवफ़ा निकला,अपनी मनमानी करता रहा। मैं फ़र्ज़परस्ती का फ़साना सुनाता रहा, ये मुहब्बत के नग़मे गाता रहा। शर्म के हिजाब में कैद हो पल्लू की गिरहें बाँधता खोलता रहा।झुकी पलकों से इज़हार किया ज़ुबान से इनकार करता रहा। जा न सका दूर तुझसे हर कोशिश जाने की करता रहा। बिन कहे- सुने तू चल पड़ा मैं ताकता रहा,तू दूर जाता रहा। मुहब्बत की किस्मत मैं जुदाई और नाकामी लाज़मी है,खुद को समझाता रहा। अच्छा हुआ लुका-छिपी का ये सिलसिला खत्म हुआ, दिल को मनाता रहा। आज़ादी मना कि,एक फलसफ़ा खत्म  हुआ, ये दोहराता रहा।पर झ्क पल  को भी न ये फसाना खत्म हुआ, तू मुझे याद आता रहा, तू मुझे याद आता रहा।  -अनिता ज...

इस जहाँ से किनारा कर लूँ

इस जहाँ से किनारा कर लूँ जिंदगी का सफ़र तन्हा मुश्किल लगता है मुझ को, आ कि,हमसफ़र तेरा हाथ थामकर जहाँ से किनारा कर लूँl पथरीली राहों में डगमगाऊँ तो तू थाम ले मुझको, आ कि,सर तेरे काँधे पे रखके शाम को सहर कर लूँl इज़हार- ए -मुहब्बत न करूँ ज़ुबां से तू खुद ही समझ ले मुझको, आ कि, इस जहाँ से चुराकर तुझे निगाहों में भर लूँl जिंदग़ी के दिए ज़ख्मों से दिल जो दर्द दे मुझको, आ कि, चार अश्क तेरे काँधों पे बहा के मैं सुकून कर लूँl तू साथ होता है तो हर राह आसान लगती है मुझको, आ कि, भुलाकर शिकवे -गिले सफर -ए-ज़िंदग़ी तेरे संग तय कर लूँl जो ख़ुशियाँ दामन में भर-भर कर दी तूने मुझको, आ कि,उनसे चमन सजाके अपना अपने नसीब पर फ़क्र कर लूँl मेरे घोंसले के नन्हें परिंदे उड़ चले अपना नशेमन बसानेको, आ कि, तुझसे गुफ्तगू कर उनका बचपन याद कर लूँl आ कि, तेरा हाथ थामकर जहाँ से किनारा कर लूँl  अनिता जैन weekendshayar.blogspot.in

कविताः हमेशा के लिए सो जाने दो

कविताः हमेशा के लिए सो जाने दो  झूठी हँसी में लिपटे तेरे-मेरे अश्कों की नुमाइश बहुत हुई।तबाह जिस्मो - रूह के सायों से ज़िंदग़ी के गुलशन  की बरबादी बहुत  हुई। दिल कहता है अब बेमौसम बादल बरस जाने की रुत आने दो।  बेताबी कहती है अब खयालों के जंगलों से हकीकतों के रास्ते तय पा जाने दो ।  तड़पते अरमानों की झुलसती आग मेें खुद को झोंकने की कवायद बहुत हुई। बेलौस बहते आँसुओं के दरिया में दरो- दीवार के साथ डूब जाने की कोशिश बहुत हुई। माथे की शिकन मिटाकर कोयल के मीठे नग़मे के साथ प्यार का साज़ बज जाने दो। मुस्कुराकर लाल पीले फूलों को इन ज़ुल्फ़ों में सज जाने दो बारिश के मौसम के साथ आँसुओं के सैलाब बहा लेने  की रवायत बहुत हुई। हँसते - गाते पंछियों के सुर में अपनी आहें मिलाकर छुपाने की नाकाम साज़िश बहुत हुई।  तुम्हारी जुदाई का ग़म  सहकर मैं ज़िंदा हॅूँ इस बात की दावत हो जाने दो। मुझसे बिछड़ कर तुम खुश और आबाद हो इस बात का जश्न हो जाने दो।  टूटे दिल  की  धमक से मुरझाए चेहरे को झूठे श्रृंगार से सजाने  की तकलीफ़ बहुत हुई।  ...

Dard e ishq

कविता : दर्द - ए-इश्क दर्द- ए - इश्क जो दिल की गहराई में पैबस्ता है, उसे अश्कों में बहा लूँ कि, तेरी बेरुखी का खंजर इस दिल कॊ नज़र कर दे । तेरी पलकों से झरते आँसुओं को अपने दामन में समेट लूँ कि, बेधड़क तेरे अश्क मेरे दिल  को  नज़र कर दे । झूठी  ही सही दिखावे की ही सही ऐ मग़रूर आ कि, इक मुस्कुराहट तो इस चेहरे  को नज़र करदे। टूटे आईने के टुकड़ों से इस दिल में बाग़ुरूर ही झाँक ले ज़रा, ये भरम ही सही अपनी परछाई तो इस टूटे दिल को नज़र कर दे । तेरी राह में बिछी मेरी पलकों से ख़्वाब चुराकर रोशन करले अपना जहाँ , बदले में अपनी ज़िंदग़ी के अँधेरे इन आँखों को नज़र करदे। अनिता जैन weekendshayar.blogspot.in and weekendshayar.com 

सफ़र - ए-मुहब्बत

सफ़र - ए-मुहब्बत : - आ इस तरह तुझसे बात करें कि, तुझे लफ्ज़ों में ढालें पर लफ़्ज़ों को ज़ुबां न दें। आ इस तरह तुझसे बात करें। आ इस तरह तेरा दीदार करें कि, तुझे आँखों में बसाएं पर तुझी से आंखें चार न करें। आ इस तरह तेरा दीदार करें। आ इस तरह तुझसे मुलाकात करें कि, हर जगह तेरी ही बात करें पर तुझी से बात न करें। आ इस तरह तुझसे मुलाकात करें। आ इस तरह तुझे दुआओं में सजाएं कि, दिन - रात तेरी खैरियत रब से माँगें पर तुझसे ही तेरी ख़ैरियत न पूछें। आ इस तरह तुझे दुआओं में सजाएं । आ इस तरह सफ़र - ए -मुहब्बत तय करें कि, तुझे दिल में क़ैद करलें पर तुझीसे मुहब्बत का इज़हार न करें। आ इस तरह सफ़र -ए - मुहब्बत तय करें। अनिता जैन @ weekendshayar.blogspot.in and weekendshayar.com 

Hamari Muhabbat

                              हमारी मुहब्बत  तेरा मिलना रब की रज़ा थी, बिछड़ना उसकी दी सज़ा थी।हमने कुबूल किया दोनों को कि,हमारी मुहब्बत बहुत पाकीज़ा थी। तेरी-मेरी मुहब्बत रूह और दिल पर लिखी ज़हीन सी ताबीर थी। न फ़ट सके न मिट सके कि, ये न कागज़ी थी न कलमी थी। अब दिल के दरके शीशे जुड़ न पाएंगे कि, ये चोट दिल पर आख़री थी। न और कोई सूरत दिल में बसा पाएंगे कि, शीशा  - ए - दिल में बसी तेरी सूरत आख़री थी। अब ज़माने के सितम हँसकर झेल जाएंगे कि, जिसे वो गुनाह समझे, वो हमारी पाक मुहब्बत थी। न कोई गिला न शिकवा  करने की तमन्ना  अब कि, हमारी मुहब्बत इज़हार-ओ-इकरार   की मुहताज़ न थी। जो चार दिन गुज़ारे तेरे साथ लगता है, वो मेरी पूरी ज़िंदग़ीथी।ज़माने के सितम हसीं थे, धूप भी चाँदनी सी नर्म थी। रूह-ओ- दिल  को  सुकून  था, न कोई  आस  न तिष्नगी थी। तेरे ही दम से हवाएँ पुर सुकून और  कूचा- ए- दिल  में हर लम्हा बहार थी। कोई भी इल्ज़ाम अब हमें न तोड़ पाएगा कि, ...

Mera paigam

कविता : - मेरा पैग़ाम ।  चलने लगी फ़ागुनी बयार,  कि खिड़कियाँ खुली रखना, कोई  हवा का झोंका,  मेरा पैग़ाम लाता ही होगा। उड़ने लगे रंग, अबीर और गुलाल, जी भर के होली खेलना, कि हर रंगे - पुते चेहरे में, मेरा चेहरा नज़र आता ही होगा। गर्मी की तपती दुपहरी में,  लेटे-लेटे छत को ताकते रहना,  कि उसमें कहीं हँसता हुआ, मेरा अक्स नज़र आता ही होगा।  सावन की फुहारों में,  भीग-भीग कर दूर निकल जाना, कि इन फुहारों में मेरा प्यार, तुम्हारे चेहरे को सहलाता ही होगा। पतझड़ के पत्तों की खड़खड़ाहट को,  कान लगाकर सुनना, कि उनमें मेरी सदाओं का,  संगीत सुनाई देता ही होगा।  सर्दी की ठंडी  रातों  में,  अलाव जलाकर रखना, कि उठती - गिरती लपटों में मेरा चेहरा,  कभी गायब कभी नुमाया होता ही होगा।  हर मौसम में अपने जी में,  आस जगाए रखना,  कि खुदा हमारे प्यार की,  पाकीज़गी को परखता ही होगा। -अनिता जैन Weekend shayar.in

Zindagi teri saugat ho gai

कविता : - ज़िंदगी तेरी सौगात हो गई। ग़म के सफ़र  में एक दिन खुशी से मुलाकात हो गई, चलते -चलते जो तेरे बारे में बात हो गई। तेरे आँगन में बैठे थे तेरी  आमद के इंतज़ार में, पता नहीं कब दिन ढला और शाम के बाद रात हो गई। बुलबुल ने सरगोशी से कुछ कहा गुल के कान में, मुझे लगा मेरे दिल की  तेरे दिल से  बात हो गई। इस रफ़्तार - ए - ज़िंदगी में दो पल ख्‍याल जो आया तेरा, लगा बरसों से बंज़र ज़मीं पर फूलों की बरसात हो गई। तुझसे न गिला, न शिकवा, न शिकायत का हक है मुझको, पर क्यूं लगता है कि,  जैसे ये ज़िंदगी तेरी सौगात हो गई। तुझसे उम्मीद - ए - वफ़ा बेमानी है, ये खबर है मुझको, फिर भी हर महफ़िल में तुझे याद करना मेरी आदत हो गई है। मेरी मुहब्बत से तेरी रुसवाई न हो जाए, इस ख्याल से, तुझे दिल में छुपाकर तुझसे सरोकार न रखना मेरी फ़ितरत हो गई  है। अनिता जैन Weekend shayar .blogspot.in

Teri parwah kisko hai

कविता : - तेरी परवाह किसको है। तू खिलाड़ी, दिलों से खेलना तेरी आदत है, तेरे  वादों पे ऐतबार किसको है। तू मुसाफिर, भटकता  दर- ब - दर है, तेरे जाने पर ऐतराज़ किसको है। तू परिंदा आसमानी, उड़ता यहाँ -वहाँ है, तेरी परवाज़ पर इख्तियार किसको है। तू बिन  आब (पानी) का बादल , डोलता फ़िरता यूं ही है, तेरे न बरसने पर मलाल किसको है। तू न दोस्त, न दुश्मन, तुझसे नाता कुछ यूं ही है, तेरे होने या न होने की परवाह किसकोहै। - अनिता जैन weekendshayar.blogspot.in
शायर इश्क की बात करता है,  तो दुनिया सवाल करती है।  शायर दिल की बात  करता है,  तो दुनिया बवाल करती है। दिल और इश्क  तो वो शै हैं, जिन पर शायर की दुकान चलती है। -अनिता  जैन  weekendshayar .blogspot.in

Roe to ham tab bhi na the

कविताः - रोए तो हम तब भी न थे।  इतना ग़म सहकर हंसते क्यूं हो, ज़माना कहता है, रोए तो हम तब  भी न थे, जब कल ही दिल टूटा था। हंसते हैं उन  लम्हों की यादों में, जो तेरे साथ गुजारे है, रोए तो हम तब भी न थे, जब तू ग़ैर बनकर गुज़रा था। तन्हाई के आलम को, तेरे खयालों से आबाद करते है,  रोए तो हम  तब भी न थे, जब तेरा हाथ छूटा था। रोना हमारी फ़ितरत नहीं, हँसना हमारी आदत है,  रोए तो हम तब भी न थे, जब तुझको रोते देखा था।                - अनिता जैन weekend shayar .in